इम्तियाज अली की नई फिल्म "मैं वापस आऊंगा" सिनेमाघरों में धीमे-धीमे जगह बना रही है, लेकिन इसी के साथ एक सोशल मीडिया बहस भी जोर पकड़ चुकी है। कुछ नेटिज़न्स ने फिल्म को 'राष्ट्र-विरोधी' करार दिया, यह आरोप लगाते हुए कि फिल्म पाकिस्तान को आतंक और जासूसों से परे एक सामान्य समाज के रूप में दिखाती है। इस विवाद पर ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान ने सहजता से अपनी प्रतिक्रिया दी है।
रहमान ने हाल ही में इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक सैटायरिकल पोस्ट साझा की, जिसमें फिल्म के आलोचकों पर व्यंग्य किया गया था। पोस्ट की हेडलाइन ने सवाल उठाया — "राष्ट्र-विरोधी? फिल्म ने पाकिस्तान को बिना आतंकवादियों और गुप्त एजेंटों के दिखाने की हिम्मत कैसे की?" रहमान ने इसे गंभीर राजनीति के बजाय हल्के अंदाज में लिया और पोस्ट शेयर करते हुए केवल एक हंसने वाला इमोजी लगाकर इस बहस को अनावश्यक बताया।
जिस स्क्रीनशॉट को रहमान ने शेयर किया, उसमें एक दर्शक के ज़रिये हमारी फिल्मों की दी गई रूढ़िवादी छवि पर तीखा तंज था। कैप्शन में दर्शक की आशंका और बाद की स्वीकार्यता का जिक्र था: वह उम्मीद कर रहा था कि फिल्म में किसी भारतीय जासूस का बदला दिखेगा, और अंत में जब नायक कहता है "मैं वापस आऊंगा" तो वह आश्चर्यचकित था कि फिल्म में आतंकवादियों या गुप्त एजेंटों का कहीं नाम तक नहीं। हालांकि दर्शक फिल्म के भावनात्मक ड्रामे से प्रभावित भी हुआ और बाद में माना कि पाकिस्तान में भी हमारी तरह आम लोग रहते हैं — यह अनुभव उसके लिये नया और सोचने वाला था।
फिल्म के संगीत ने भी दर्शकों की सराहना बटोरी है। ए.आर. रहमान और इरशाद कामिल की जोड़ी ने इस फिल्म के लिए साउंडट्रैक तैयार किया है, जिसमें "क्या कमाल है", "मस्कारा" और "इश्क मस्ताना" जैसे गीत पहले ही लोकप्रिय हो चुके हैं। यह जोड़ी इम्तियाज अली के साथ अब पांचवीं बार साथ नजर आई है; इनसे पहले उन्होंने "रॉकस्टार", "हाईवे", "तमाशा" और "अमर सिंह चमकीला" में संगीत से दर्शकों को जोड़ दिया था।
सिनेमा और सामाजिक संदर्भों के बीच यह टकराव नया नहीं है, पर इस बार का विवाद दर्शाता है कि दर्शक किस तरह से फिल्मों को राष्ट्रीय पहचान और राजनीतिक रेखाओं से जोड़कर देखते हैं। वहीं कलाकार और निर्माता, जैसे रहमान और अली, फिल्म की कथात्मक स्वतन्त्रता बनाए रखने को प्राथमिकता देते दिख रहे हैं — और उनका यह रवैया किसी हिस्से के लिये प्रोत्साहन और किसी हिस्से के लिये नाराज़गी का कारण बन रहा है।