अमिताभ बच्चन की हाल की पोस्ट ने फिर सबको चौंका दिया है। 83 वर्ष की उम्र में भी उन्होंने एक ही दिन में 12 शॉर्ट फिल्में और दो स्टिल शूट पूरे किए। पूरा दिन काम के बाद वे देर रात तक सक्रिय रहे और अपने ब्लॉग पर फैंस से जुड़ना अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने लिखा, "काम तो काम है... काम तो काम है... काम तो काम है...!!!" यह वाक्य उनके अटूट समर्पण और मेहनत की छोटी सी झलक है।
बिग‑बी के लिए काम केवल पेशा नहीं, जीवन पद्धति है। वे कहते हैं कि लगातार तैयारी, सीखना और पूरी निष्ठा से काम करना चाहिए। उम्र चाहे कितनी भी हो, इन बातों से समझौता नहीं होना चाहिए। यही कारण है कि वे लंबी शिफ्टों के बाद भी फैंस से बातें करते हैं, उनसे जुड़ते हैं और अपने अनुभव साझा करते हैं। उनके लिए फैंस सिर्फ दर्शक नहीं, दैनिक प्रेरणा का स्रोत हैं।
अमिताभ की यह कार्यशैली और अनुशासन न केवल उद्योग में बल्कि युवा कलाकारों के लिए भी मिसाल बन चुका है। वे दिखाते हैं कि शरीर की गिरावट अकेले लक्ष्यनिष्ठा और मनोबल से मात नहीं खा सकती। शोध, तैयारी और इच्छाशक्ति से काम की गुणवत्ता बरक़रार रखी जा सकती है। इसके साथ ही उनका यह तरीका बताता है कि काम के साथ रिश्तों को जोड़ना भी ज़रूरी है—फैंस से सजीव संवाद उनके दिन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
वर्कफ्रंट की बात करें तो अमिताभ बच्चन 'कल्कि 2898 एडी' के दूसरे हिस्से में भी दिखाई देंगे। पहले भाग में उनके द्वारा निभाया गया अश्वत्थामा किरदार बहुत पसंद किया गया था और अब दर्शक उसी दमदार वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। फिल्म का सीक्वल बन रहा है, पर रिलीज़ डेट अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं हुई है। फिर भी उम्मीद यही है कि बिग‑बी की उपस्थिति फिल्म में वही प्रभाव छोड़ती रहेगी जो पहले देखने को मिला था।
अमिताभ बच्चन की इस उम्र में भी काम करने की लगन, लगन के साथ सीखते रहने की प्रवृति और फैंस से जुड़ने की आदत ही उनके सफलता के असली मंत्र नज़र आती है। 83 साल की आयु में भी उनका जोश बताता है कि जुनून और अनुशासन से उम्र केवल एक संख्या बन कर रह जाती है।