फरहान अख्तर, जिनका करियर अधिकतर निर्देशक के रूप में रहा है, पिछले कुछ वर्षों में निर्देशन के मोर्चे पर संघर्ष कर रहे हैं। उनकी महत्वाकांक्षी योजनाएँ—जी ले ज़रा और डॉन 3—अटक चुकी हैं। जी ले ज़रा को कातरीना कैफ, प्रियंका चोपड़ा और आलिया भट्ट की साझा उपलब्धता चाहिये थी; अब यह परियोजना फिर से कास्ट की मांग करती है। डॉन 3 की कथा भी सार्वजनिक है और वह रुकी पड़ी है। निर्देशक के रूप में उनकी पिछली फिल्म डॉन 2 वर्ष 2011 की है।
फरहान कहते हैं कि वे दोनों फिल्में कभी बनाएंगे, पर फिलहाल उन्हें एक कदम पीछे हटना होगा। इस समय अभिनय उनकी प्राथमिकता बन चुका है। वह पंडित रवि शंकर का किरदार निभा रहे हैं और उसकी तैयारी में पूरा जोर लगा रहे हैं। अभिनय की ओर उनका मार्ग अचानक नहीं था। पहले उन्हें आनंद सुरापुर ने ले जाकर 'द फकीर ऑफ वेनिस' में मुख्य भूमिका के लिए मनाया था; वहीं उनका पहला अभिनय अनुभव सुखद रहा। फिर गत्तू यानि अभिषेक कपूर से मुलाकात हुई और 'रॉक ऑन!!' ने अभिनय की नई संभावनाएँ दिखाईं। इन परियोजनाओं के बाद उन्होंने 'लक बाय चांस', 'भाग मिल्खा भाग' और 'दिल धड़कने दो' जैसी फिल्मों में अभिनय कर और परिपक्वता हासिल की।
अभिनय ने उन्हें नई पहचान दी है, पर निर्देशन की चाह भी अभी जिंदा है। फिलहाल वे अभिनय के माध्यम से अपने भीतर के कलाकार को तलाश रहे हैं—शांत, संकल्पी और तैयारी में डूबा हुआ—ताकि जब समय मिले, तब वे वापस निर्देशकीय कुर्सी पर लौटकर वही क्षमता दिखा सकें जो कभी उन्हें निर्देशक के रूप में परिभाषित करती थी।