डॉ प्रकाश हिंदुस्तानी
निहारिका की शार्ट फिल्म अभया !
निहारिका लाल फ्रेंकलिन की शार्ट फिल्म -'अभया : अ फाइट अगेंस्ट फीमेल फीटिसाइड' देखी। कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर समस्या और रूढ़िवादी आज भी है। घर में सिर्फ बेटा ही पैदा होना चाहिए । गैर-कानूनी रूप से भ्रूण का लिंग परीक्षण कराने और बेटी होने पर उसे खत्म करने के षड्यंत्र अब भी जारी हैं।नई बहू को लगता है कि उसका पति 'भी इस अपराध में शामिल है लेकिन अंत में ट्विस्ट आता है, जहाँ एक युवक अपनी बेटी को बचाने के लिए अपने ही माता-पिता से सच छुपाता है। फिल्म में समाज की कड़वी सच्चाई है, जहाँ एक तरफ दादा-दादी बेटियों को 'बोझ' और 'दहेज की लायबिलिटी' मानते हैं , वहीं दूसरी तरफ बेटा और उसकी माँ इस सोच के खिलाफ खड़े होते हैं।बच्ची की दादी का एकालाप है कि मैंने 30 साल तक अपने मायके और ससुराल के लिए त्याग किया है और वह एक नारी की कीमत जानती है। यह किरदार शुरुआत में भले ही शांत दिखता है, लेकिन अंत में अपनी बहू और पोती के समर्थन में उनका खड़ा होना और अपने पिछले 20 साल पुराने पाप (संभवतः एक बेटी को न बचा पाने का पछतावा) का प्रायश्चित करना कहानी को मजबूत बनाता है। अंत सकारात्मक और बदलाव की उम्मीद जगाने वाला है। बच्ची का नाम 'अभया' सीधे तौर पर महिला सशक्तिकरण का संदेश देता है। अंत में बैकग्राउंड में बजने वाली कविता नारी की असीम शक्ति और उसके विविध रूपों (धूप, सागर, तूफान, मशाल) को बयां करती है। बेहतरीन अभिनय, मजबूत निर्देशन और संवेदनशील सस्पेंस के साथ यह शॉर्ट फिल्म नए फ़िल्मकार की संभावना का परिचय देती है।