लक्ष्मी पाण्डेय
फैशन सिर्फ सजा-संभाल नहीं है; यह बात चलाने और प्रेरित करने का जरिया भी बन सकता है। डिजाइनर, उद्यमी और सांस्कृतिक प्रवक्ता अंजलि फोगाट इसी सोच से काम करती हैं। वे वर्षों से कपड़ों के जरिये परंपरा और दुनिया के बीच अर्थपूर्ण संवाद बनाती आ रही हैं। कान्स फिल्म फेस्टिवल में उनकी उपस्थिति एक संदेश है। इस साल वह फ्रेंच रिविएरा ऐसे संदेश के साथ लौटीं जो भक्ति, संस्कृति और भारतीय सौंदर्य से जुड़ा था, और विश्व ने इसे सराहा।
अंजलि खुद को कहती हैं—दूरदर्शी, उद्देश्य-धारी, लचीली, आध्यात्मिक, वैश्विक, प्रामाणिक और प्रभावशाली। पिछले सात सालों से उन्होंने कान्स में अपनी अलग पहचान बनाई है। वहां वे केवल फैशन नहीं दिखातीं, बल्कि भारतीय विरासत और हस्तकला की कहानियाँ भी पेश करती हैं। इस बार उन्होंने रेड कार्पेट पर राधा की कथा को सजा कर लाया। उनके अनुसार राधा बिना शर्त प्रेम, भक्ति और दिव्य नारीत्व का प्रतीक हैं। राधा-प्रेरित परिधान में हाथ की कढ़ाई, पारंपरिक शिल्प और भक्ति के संकेत थे, जिन्हें आधुनिक फैशन के अंदाज में पेश किया गया।
रेड कार्पेट के अलावा अंजलि ने मीडिया साक्षात्कार, नेटवर्किंग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में भी हिस्सा लिया। जीएसएफ अवॉर्ड्स में उन्हें 'ग्लोबल फैशन विजनरी' सम्मान मिला, जिसने यह भरोसा और बढ़ाया कि फैशन संवाद और प्रेरणा का असरदार माध्यम है। कान्स उनके लिए दर्पण और आवाज दोनों रहा—यह मंच भारतीय कारीगरों और डिजाइनरों को दुनिया से जोड़ता है और लोगों को सच्चाई व उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।