हिमांशु राज़
विश्व पर्यावरण दिवस पर अभिनेत्री शुभांगी अत्रे ने चिंता जताते हुए कहा कि आज इंसान और प्रकृति के बीच संतुलन बिगड़ गया है। उन्होंने बताया कि समस्या केवल प्रदूषण तक सीमित नहीं है, बल्कि मनुष्यों का पर्यावरण पर हावी हो जाना अधिक गंभीर है। “हम अब संसाधन इस्तेमाल नहीं कर रहे, उन्हें नष्ट कर रहे हैं। जंगल गायब हो रहे हैं, जानवर अपने आवास खो रहे हैं और मौसम का स्वाभाव बदल रहा है,” उन्होंने कहा।
प्लास्टिक प्रदूषण के बारे में शुभांगी ने कहा कि यह धीरे-धीरे प्रकृति को घुटन देता है। “प्लास्टिक ऐसा है जो धरती और जल को खुलकर साँस लेने नहीं देता, और जानवर सबसे अधिक प्रभावित होते हैं क्योंकि वे इसे समझ नहीं पाते।” उनके अनुसार हरे-भरे स्थानों में प्लास्टिक का दृश्य भी मन आहत कर देता है और प्रकृति की शांति भंग करता है।
व्यक्तिगत जीवन में वे सरल तरीकों से प्रकृति से जुड़ी रहने पर विश्वास करती हैं। “मैं कोशिश करती हूँ कि जीवन प्रकृति के करीब हो,” उन्होंने बताया। पौधों की देखभाल से लेकर अनावश्यक कचरे से बचना, पानी और बिजली का सावधानी से उपयोग करना—ये छोटे-छोटे कदम महत्वपूर्ण बदलावा ला सकते हैं। “जब आप प्रकृति से जुड़े रहते हैं तो अपने चुनावों के प्रति अधिक सतर्क हो जाते हैं,” उन्होंने कहा।
भविष्य को लेकर शुभांगी ने चेतावनी दी कि यदि प्रदूषण यूँ ही बना रहा तो दुनिया अपनी प्राकृतिक शांति खो सकती है। साथ ही उन्होंने भावनात्मक क्षति की भी बात कही—लोगों को वह सादे सुख और शांति मिस होगी जो प्रकृति देती है। संदेश देते हुए उन्होंने कहा, “हमें शांत होना चाहिए और प्रकृति को निहारना व देखना चाहिए। अगर हम उसका सम्मान करेंगी तो वह हमें पालती रहेगी। रोजमर्रा की छोटी कोशिशें भी उसे बचाने में मदद कर सकती हैं।”---