"वो बकवास करती है": अशोक पंडित का कंगना पर तीखा प्रहार

04 जून 2026
"वो बकवास करती है": अशोक पंडित का कंगना पर तीखा प्रहार

हिमांशु राज़ 

बॉलीवुड में एक बार फिर ज़ुबानी जंग छिड़ गई है। एफडब्लूआईसीई के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने अभिनेत्री कंगना रनौत के बयान पर कड़ा प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पंडित ने कहा, "तुम बकवास करती हो, इसीलिए मैंने तुम्हें बैन किया है।" इंडस्ट्री में उनके खिलाफ गालियों और कंगना की कुछ टिप्पणियों के बाद उन्होंने कहा कि लोग पूरी बात समझे बिना ही कमेंट कर रहे हैं।
पंडित ने स्पष्ट किया कि एफडब्लूआईसीई रणवीर सिंह के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से नहीं है। विवाद तब शुरू हुआ जब फरहान अख्तर की उम्मीद वाली फिल्म 'डॉन 3' से रणवीर सिंह अचानक बाहर निकल गए। फरहान ने एक्टर के खिलाफ एफडब्लूआईसीई से शिकायत की और 45 करोड़ रुपये के प्री-प्रोडक्शन नुकसान का हर्जाना मांगा। इसमें ओवरसीज रीकैस, होटल बुकिंग और 200 से अधिक कर्मचारियों के प्रबंधन के खर्च शामिल हैं।
फेडरेशन ने तब 'नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव' जारी किया—यह कानूनी बैन नहीं है। एफडब्लूआईसीई के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने स्पष्ट किया, "हम कोई कोर्ट नहीं हैं जो किसी पर बैन लगा सकें। हमने सिर्फ असहयोग का नोटिस जारी किया है," अर्थात सदस्यों को एक्टर के साथ काम न करने की सलाह दी गई थी। रणवीर को तीन बार नोटिस और चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया, पर वे एक बार भी सामने नहीं आए। रणवीर की तरफ से जवाब में कहा गया कि मामला एफडब्लूआईसीई के अधिकारक्षेत्र में ही नहीं आता, जिससे नाराज होकर संस्था ने NCD जारी किया। बाद में रणवीर ने एफडब्लूआईसीई को लीगल नोटिस भेजा और संस्था ने असहयोग निर्देश वापस ले लिया।
कंगना रनौत ने इस विवाद पर 'भारत भाग्य विधाता' ट्रेलर लॉन्च पर कहा, "जब आपकी हैसियत बढ़ती है तो आपके दुश्मन भी बढ़ते हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि आपकी हैसियत बढ़े और दुश्मन न बढ़ें। रणवीर को सोचना चाहिए कि उनकी क्या हैसियत है कि उनके इतने दुश्मन बन गए।" उन्होंने रणवीर के समर्थन में यह टिप्पणी की और कहा कि अंत में सब ठीक हो जाता है।
पंडित ने जोर देकर कहा कि विवाद के बैकग्राउंड को समझे बिना लोगों को सार्वजनिक राय नहीं देनी चाहिए। मामला तकनीकी और करार-संबंधी है, व्यक्तिगत नहीं—इसे सही संदर्भ में देखना चाहिए। एफडब्लूआईसीई का उद्देश्य इंडस्ट्री के हितों की रक्षा करना है, किसी एक्टर को निशाना बनाना नहीं। आज संस्था के कथित तौर पर 4 लाख कर्मचारी जुड़े हैं, और इन विवादों से उनकी रोज़गार पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए संस्था ने यह कदम उठाया है। भविष्य में सभी सदस्य व्यक्तिगत रूप से अपना फैसला ले सकते हैं। विवाद अभी भी बहस का विषय है और सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थन-विरोध में चर्चा जारी है। आगे क्या होगा, यह दोनों पक्षों की आगे की कार्रवाई और संवाद पर निर्भर करेगा।