हिमांशु राज़
अभिनेत्री सोमि अली ने विश्व पर्यावरण दिवस पर साफ कहा कि हम अपनी ही धरती को जहर दे रहे हैं। उनका कहना है कि समस्या सिर्फ आंकड़े नहीं हैं—सबसे बड़ी समस्या है इंसान और प्रकृति का अलग होना। जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक का बढ़ता कचरा, पेड़ों की कटाई और जीवों का घटता होना—ये सब बच्चों और गरीबों के जीवन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सोमि ने प्लास्टिक प्रदूषण पर खास चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक जमीन, नदियाँ और समुद्र में टूटकर छोटे‑छोटे टुकड़ों में बदल जाता है और हमारे शरीर में भी चला जाता है। समुद्री जीव प्लास्टिक को खाना समझकर मर रहे हैं। कुछ मिनट की सुविधा के लिए बनाया गया प्लास्टिक सैकड़ों साल तक जीवन को नष्ट करता है। "हम सच में उस धरती को ज़हर दे रहे हैं जो हमें पालती है," उन्होंने कहा।
उन्होंने बताया कि पर्यावरण की रक्षा रोज़मर्रा की छोटी‑छोटी आदतों से होती है। वे बाथरूम और कमरे से बाहर जाते ही बिजली और एयरकंडीशनर बंद कर देती हैं। अपने बालकनी में पौधे लगाती हैं। वे एकल‑उपयोग प्लास्टिक बैग नहीं लेतीं और अपने एनएमटी जूट बैग साथ रखती हैं। पानी बचाती हैं और कचरा घटाने की कोशिश करती हैं। वे चाहती हैं कि लोग जीवन के बाद भी अंगदान या दान करके कुछ लौटाएँ।
अगर हम ऐसे ही चलते रहे, तो 2050 तक कई तटीय शहर पानी में डूब सकते हैं, तेज़ गर्मी आम हो जाएगी और साफ़ पानी महँगाई बन जाएगा। अमीर बच न पाएँगे, पर गरीबों को सबसे ज्यादा दुख होगा। सोमि का संदेश साधारण है: धरती को हमसे सब कुछ नहीं मिलता; हमें छोटी‑छोटी आदतें बदलनी होंगी—बैग बदलो, पानी बचाओ, प्लास्टिक न लो। परफेक्ट होना ज़रूरी नहीं, मगर लगातार और सजग रहना ज़रूरी है। अगर हम एक बच्चे या एक जीवन की रक्षा कर सकते हैं, तो हम अपनी धरती की भी रक्षा कर सकते हैं।