सुमन कल्याणपुर: संगीत के सुनहरे अध्याय का अंत

01 जून 2026
सुमन कल्याणपुर: संगीत के सुनहरे अध्याय का अंत

डॉ श्याम किशोर मिश्र/हिमांशु राज़ 

स्वर साधना का एक और अध्याय अब समाप्त हो गया,संगीत जगत में गहरा शोक व रिक्तता छाई है। दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम मुंबई के लोखंडवाला में स्थित अपने निवास पर निधन हो गया। वह 89 वर्ष की थीं। उनकी आवाज़ से जुड़े लाखों प्रशंसक आज भी उस मधुर स्वर को याद कर रहे हैं, जिसे सुनकर उनके दिल धड़कते थे।
सुमन कल्याणपुर का जन्म सन् 1937 में उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था। उनके पिता स्वयं संगीतकार थे, अतः बचपन से ही संगीत उनके रगों में बहता था। बचपन में ही उन्होंने संगीत की औपचारिक शिक्षा प्राप्त की और जल्द ही उनकी आवाज़ में वह जादू प्रकट हुआ, जो बाद में करोड़ों लोगों को मोहित किया। उनका संगीत सफर मराठी फिल्मों से आरंभ हुआ, जहाँ उन्होंने अपनी स्पष्ट पहचान बनाई। मराठी में उनकी जीवनी 'सुमन सुगंध' नाम से प्रकाशित हुई है, जो उनकी जीवन यात्रा की गहराई को दर्शाती है। सबसीक्वेन्ट में वे हिंदी सिनेमा में कदम रखीं और वहाँ भी उतनी ही सफलता प्राप्त की।
सन् 1960 और 1970 के दशक में सुमन कल्याणपुर की आवाज़ बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय आवाज़ों में से एक थी। उस दौर में जब लता मंगेशकर का राज था, सुमन कल्याणपुर ने भी उतनी ही प्रभावशाली तरीके से अपनी पहचान स्थापित की। उनकी आवाज़ में लता मंगेशकर जैसी ही मधुरता और भावना थी, जिससे उनकी तुलना अक्सर लता जी से की जाने लगी। यह तुलना उनकी अद्वितीय प्रतिभा की सबसे बड़ी गवाही थी।
सुमन कल्याणपुर ने अनेक सुपरहिट फिल्मों में अपनी मधुर आवाज़ दी। 'ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे', 'तुमने पुकारा हम चले आए', और 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे' जैसे गीत आज भी सुनने वाले के हृदय को छू लेते हैं। ये गाने केवल गाने नहीं थे, बल्कि लाखों लोगों की भावनाओं का प्रतीक थे।
सुमन कल्याणपुर के अतुलनीय योगदान को मान्यता देते हुए सन् 2023 में केंद्र सरकार ने उन्हें भारत के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मभूषण से નવાजा। यह सम्मान उनके 70 वर्षों के संगीत सफर और लाखों लोगों के हृदयों पर राज करने की उनकी क्षमता का प्रतीक था। पद्मभूषण पुरस्कार प्राप्त करने पर उन्होंने कहा था कि यह सम्मान केवल उनके लिए नहीं, बल्कि सभी संगीत प्रेमियों के लिए है जिन्होंने उन्हें प्रोत्साहन दिया। यह पुरस्कार उनके जीवन की सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक था। सुमन कल्याणपुर ने हिंदी, मराठी, गुजराती, बंगाली और अनेक अन्य भाषाओं में गाने गाए। उनके गानों में गहराई, भावना और मधुरता का अनोखा मिश्रण था। उनकी आवाज़ की विशेषता यह थी कि वह हर भावना को बखूबी व्यक्त कर सकती थीं—चाहे वह प्रेम हो, विरह हो, या खुशी। उनके गाने आज भी शादियों, पर्व-त्योहारों और विशेष अवसरों पर बजते हैं। नई पीढ़ी भी उनके गानों को सुनकर मोहित होती है। यह उनकी कला की अमरता का प्रमाण है। सुमन कल्याणपुर के निधन पर बॉलीवुड और संगीत जगत में गहरा शोक छा गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और दिग्गज नेता शरद पवार जैसे माननीय नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है। शरद पवार ने ट्वीट करते हुए लिखा कि सुमन कल्याणपुर का निधन संगीत जगत के लिए एक बड़ा नुकसान है और उनकी आवाज़ हमेशा याद रहेगी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि संगीत के सुनहरे अध्याय का अंत हो गया है।
सुमन कल्याणपुर केवल एक गायिका नहीं थीं, बल्कि वे एक युग की प्रतीक थीं। उनकी आवाज़ ने लाखों लोगों के हृदयों को छूया, उनकी भावनाओं को व्यक्त किया और उन्हें स्मृतियाँ दीं, जो आज भी हमारे साथ हैं। उनका संगीत कभी नहीं मरेगा, क्योंकि सच्चा कलाकार कभी नहीं मरता। वह अपने कर्मों और कला के माध्यम से हमेशा जीवित रहता है।
आज हम सुमन कल्याणपुर को याद कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज़ हमेशा हमारे हृदयों में बसती रहेगी। उनका संगीत, उनकी स्मृतियाँ और उनकी विरासत हमेशा हमारे साथ रहेगी। सुमन कल्याणपुर को कोटि-कोटि श्रद्धांजलि। संगीत की वह रानी अब नहीं रहीं, लेकिन उनके गाए गीत आज भी हमारे हृदयों में बजते रहेंगे।