रणवीर बनाम FWICE: 'प्रलय' पर संकट, कामगारों की रोजी-रोटी के सवाल

27 मई 2026
रणवीर बनाम FWICE: 'प्रलय' पर संकट, कामगारों की रोजी-रोटी के सवाल

हिमांशु राज़ 

रणवीर सिंह के 'डॉन 3' से अचानक हटने के बाद उत्पन्न विवाद अब किसी एक अभिनेता या एक फिल्म का मसला नहीं रहा; यह फिल्म उद्योग और संगठनों के बीच टकराव, रोजगार और जवाबदेही का आमना-सामना बन गया है। फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी की शिकायत पर फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने इम्प्लॉइज (एफडब्ल्यूआईसीई) ने रणवीर के खिलाफ 'नॉन-कोऑपरेशन' का आदेश जारी किया है और संगठन का दावा है कि इसका दायरा चार लाख से अधिक सिने कर्मियों तक फैला है। आदेश के तहत निर्देशक, कैमरा क्रू, प्रकाश क्रू, संपादन टीम, कला विभाग और स्पॉट बॉय जैसे तकनीशियन रणवीर के साथ काम नहीं करेंगे। यही पाबंदी उनकी आने वाली फिल्म 'प्रलय' के लिए सीधे संकट बन सकती है, जिसे वे निर्माता भी हैं—प्रोजेक्ट के क्रू का अभाव, शेड्यूल में व्यवधान और बजट पर दबाव संभावित परिणाम हैं, साथ ही हजारों कामगारों की रोज़ी-रोटी प्रभावित हो सकती है।
फिल्म निर्माता संजय गुप्ता ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी एक सितारे को रोकने से तीन सौ से अधिक लोगों की आजीविका टूट सकती है; "अखिर इसका क्या मतलब बनता है?" उनका तर्क है कि सजा का असर सबसे निचली परत तक पहुँचेगा, न कि केवल विवादित हस्ती तक सीमित रहेगी। अभिनेता मनोज बाजपेयी ने कहा कि अधिकांश लोग केवल सामाजिक माध्यमों पर खबरें पढ़ रहे हैं और वास्तविक सच्चाई से अनभिज्ञ हैं; वे उम्मीद करते हैं कि मामला शीघ्र सुलझ जाएगा। अशोक पंडित ने नियमों और अनुबंधों के सम्मान पर बल देते हुए कहा कि कार्रवाई में संतुलन जरूरी है ताकि आम कर्मचारियों को अनुचित हानि न हो।
मामले की पृष्ठभूमि में 2023 का वह विवाद भी याद आता है जब फरहान ने रणवीर को 'डॉन' फ्रैंचाइज़ी में जोड़ा था और तब भी यह कदम विवादित रहा था। रणवीर ने सार्वजनिक रूप से 'सम्मान' जताकर चुप्पी साध रखी है; कुछ इसे संयम मानते हैं तो कुछ इसे जिम्मेदारी से बचने का संकेत। अब निर्भर करेगा कि पक्ष संवाद के जरिए समाधान निकालते हैं या पाबंदी लंबी खिंचती है—नतीजा इंडस्ट्री की उत्पादन क्षमता, आर्थिक स्थिरता और भविष्य के अनुबंध व्यवस्था पर गहरा असर डालेगा।