टीवी के चार आर्किटेक्ट: राजन शाही, बैनिफेर‑संजय कोहली और एकता कपूर

25 मई 2026
टीवी के चार आर्किटेक्ट: राजन शाही, बैनिफेर‑संजय कोहली और एकता कपूर

भारतीय टेलीविजन ने सिर्फ मनोरंजन नहीं किया; उसने पीढ़ियों की यादें, सांस्कृतिक बातचीत और रोज़मर्रा की भावनाएँ गढ़ीं। इसके पीछे जो निर्माता खड़े हैं, वे दर्शकों की भावनाओं को समझकर कहानियाँ बनाते हैं। राजन शाही पारिवारिक ड्रामे के मैस्ट्रो हैं — "सपना बाबुल का… विदाई ", "ये रिश्ता क्या कहलाता है" और "अनुपमा" जैसी कृतियों में उन्होंने रिश्तों की सच्चाई, बलिदान और पीढ़ियों के टकराव को संवेदनशीलता से पेश किया। शाही फिल्मी विरासत से आते हैं; पी. जैरज की वार्ता और परिवार का सक्रिय योगदान (दीपा शाही, बेटी इशिका) उन्हें पारिवारिक क्रिएटिव पॉवरहाउस बनाता है।
वहीं बैनिफेर और संजय कोहली  ने हास्य की ऐसी पहचान बनाई कि घर की शामें हँसी से भर देती हैं। "भाबीजी घर पर हैं!", "हप्पू की उलटन पलटन", "एफ आई आर" और "जिजाजी छत पर है" जैसी दिखावटी नहीं, सरल और प्रतिक्रियाशील कॉमेडी ने उन्हें टीवी के 'किंग ऑफ कॉमेडी' का दर्जा दिलाया।
एकता कपूर ने टीवी की भाषा ही बदल दी। बालाजी टेलीफिल्म्स के साथ उन्होंने "क्योंकि सास भी कभी बहू थी", "कहानी घर घर की" जैसे शोज़ से एक युग की परिभाषा की; बाद में "नागिन", "बड़े अच्छे लगते हैं" और अन्य आधुनिक शृंखलाओं से लगातार रेनिवेशन का उदाहरण दिया।
ये निर्माता सिर्फ शो बनाते नहीं; वे भावनाओं के आर्किटेक्ट हैं। इनके बनाए पात्र, कथाएँ और त्योहारी एपिसोड घरों में चलती बहसों, जश्न और संवेदनाओं के हिस्से बन गए — और यही भारतीय टेलीविजन की असली ताकत है।