हिमांशु राज़
अभिनेता नसीर खान, जो प्रवीक शर्मा और पार्थ शाह की स्टूडियो एलएसडी के प्रोडक्शन "तुम से तुम तक" में झेन्दे का किरदार निभा रहे हैं, ने ऑन‑स्क्रीन केमिस्ट्री, इंडस्ट्री में दोस्ती और पेशेवर सीमाओं पर एक ताज़ा और यथार्थवादी नजरिया साझा किया। भावनात्मक कनेक्शन पर उन्होंने कहा कि अभिनय उनके लिए मुख्यतः एक पेशेवर जिम्मेदारी है: "ज़रूरी नहीं है। यह एक प्रोफेशनल जॉब है। जाओ, अपना काम करो और घर आ जाओ। फोकस काम पर होना चाहिए, माहौल पर नहीं।" केमिस्ट्री को असल और विश्वसनीय बनाने में उन्होंने एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझना जरूरी बताया: "जहाँ मतभेद आ जाता है, वहाँ परेशानी शुरू होती हैं।"
इंडस्ट्री में सच्ची दोस्ती के बारे में नसीर ने माना कि ऐसे रिश्ते कम ही बनते हैं। "बहुत कम। दोस्त बनने के लिए हँसी, आँसू, साथ में खाना, संगति और एक-दूसरे के लिए मौजूद होना चाहिए। वरना सब सह कर्मी ही हैं।" सोशल मीडिया के जमाने में व्यक्तिगत और पेशेवर सीमाएँ बनाये रखना कठिन होने पर भी उन्होंने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है। ऑफ‑स्क्रीन बांडिंग पर नसीर का तर्क साधारण और व्यावहारिक रहा: "कुछ खास नहीं। सब काम करने आए हैं, पैसे कमाने आए हैं। बस अपना काम करो।"
भावनात्मक रोल्स के लिए वे अपने व्यक्तिगत अनुभवों से ज़्यादा किरदार की भावनाओं को महत्वपूर्ण मानते हैं: "मैं उसे इतनी अहमियत नहीं देता। मैं किरदार निभाता हूँ और उसकी भावनाओं के हिसाब से चलता हूँ।" कई वर्षों में एक सबक सीखने के बारे में उन्होंने कहा कि संवाद से किसी भी बात का समाधान हो सकता है। स्वभाव से आरक्षित नसीर ने स्वीकार किया कि वे आसानी से भरोसा नहीं करते: "नहीं।" और रिश्तों को संतुलित रखने के लिए उनका मंत्र था कि चौबीस घंटे पर्याप्त हैं अगर उन्हें ठीक से इस्तेमाल किया जाये और अपने दुखों का बोझ दूसरे पर थोपने के बजाय खुद उठाना चाहिए।