हिमांशु राज़
पंजाब में आवारा कुत्तों के विरोधाभासी अभियान ने हाल‑फिलहाल सामाजिक और राजनीतिक बहस तेज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद 22 मई से पंजाब में आवारा कुत्तों को पकड़ने की मुहिम तेज कर दी गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्वयं इस मुहिम की जानकारी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से साझा की। वहीं बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन ने इस कदम पर पंजाब सरकार से इंसानियत और संतुलन बरतने की भावुक अपील की है। रवीना ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि लोगों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, पर निर्णायक निर्णय लेते समय मानवीय पहलू नजरअंदाज नहीं होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नसबंदी, टीकाकरण, बेहतर शेल्टर सुविधाएँ और वैज्ञानिक पुनर्वास के विकल्प अपनाने से न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि जंगली जानवरों के प्रति संवेदनशीलता भी बनी रहेगी। रवीना ने कहा, "बेजुबान जानवरों के साथ हमारा व्यवहार ही बताता है कि हम किस समाज के सदस्य हैं।" देश भर में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में व्यापक निर्देश दिए थे जिनमें नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर‑हाउस बनाना शामिल था। हालांकि कुछ एनजीओ‑समूहों ने उन निर्देशों के खिलाफ याचिकाएँ दाखिल की थीं। हाल ही में कोर्ट ने एक अन्य आदेश में कहा कि खतरनाक या रेबीज से संक्रमित पाए जाने वाले आवारा कुत्तों को इंजेक्शन देकर मौत के घाट उतारा जा सकता है। 19 मई के आदेश में सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को हटाने के आदेश के खिलाफ दायर सभी याचिकाएँ खारिज कर दी गईं और पिछली अदालती गाइडलाइन पर अमल न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई का संकेत भी दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक व सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएँ आईं। कई नागरिक समूह, एनजीओ और कुछ अभिनेताओं ने फैसले की निन्दा की है, वहीं सरकारें सार्वजनिक सुरक्षा के हवाले से त्वरित कार्रवाई पर जोर दे रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान केवल निष्पादन नहीं बल्कि व्यापक रणनीति — जनस्थिति जागरूकता, वैक्सिनेशन ड्राइव, मानव‑वेटरनरी समन्वय और समुचित शेल्टर नेटवर्क — से ही संभव है।रवीना टंडन की बात न केवल पशु‑हितैषिता का संकेत है बल्कि यह एक आम नागरिक‑नज़रिए से भी तैयार की गई सलाह है: कानून और व्यवस्था के साथ संवेदनशीलता भी जरूरी है। उनका आग्रह यह है कि प्रशासन पशु कल्याण संगठनों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर ऐसे उपाय अपनाए जो लोगों और जानवरों — दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
आवारा कुत्तों का प्रश्न सिर्फ एक कानूनी या प्रशासनिक विषय नहीं रहा; यह सामाजिक वैल्यूज, मानव‑हैबिटेट और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन गया है। पंजाब में चल रहे अभियान के दौरान यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या आग्रहों और वैकल्पिक सुझावों को अमल में लाया जाता है, ताकि सुरक्षा और इंसानियत दोनों के बीच संतुलन कायम रहे।