सूरत की एक न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने फिल्म निर्माता-अभिनेता अनुराग कश्यप के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश उस निजी शिकायत के बाद आया, जिसे अधिवक्ता और विश्व हिंदू परिषद के नेता कमलेश रावल ने दायर किया था। शिकायत में आरोप है कि फिल्म 'फुले' के ट्रेलर को लेकर उठी विवादास्पद स्थिति के दौरान—और उसके बाद—कश्यप ने सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की। शिकायत में यह भी जोड़ा गया है कि कश्यप ने पहले भी हिंदू समुदाय को लेकर ऐसी टिप्पणियाँ की थीं, इसलिए इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की गई थी।
अदालत ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकारते हुए पुलिस को आवश्यक प्रवर्तन हेतु निर्देश दिए। मामले की सुनवाई में बार-बार समन जारी किए गए, पर आरोपी की अनुपस्थिति के कारण गैर-जमानती वारंट भी निर्गत हुए। अब अदालत के आदेश के बाद स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, निजी शिकायत पर अदालत के इस निर्देश का अर्थ यह है कि आरोपों की सत्यता जांच की जाएगी और यदि सबूत मिले तो वैधानिक धाराओं के तहत अभियोजन संभव है। वहीं, समर्थक और विरोधी दोनों ओर से इस मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रियाएँ तेज हुई हैं, जिनमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन पर बहस देखने को मिल रही है। भविष्य में इस मामले की गम्भीरता और अदालतों में पेश होने वाली दलीलों से यह स्पष्ट होगा कि घटनाक्रम का कानूनी नतीजा क्या निकलेगा।