संदीप कपूर ने प्रतीक शर्मा–पार्थ शाह के शो "ओह हुमनावा—तुम देना साथ मेरा" की कहानी सुनकर तुरंत जुड़ने का मन बना लिया। उनका कहना है कि यह सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, बल्कि गहरे भावों वाला प्रोजेक्ट है। वे अरविंद के किरदार को असल और कई परतों वाला बताते हैं, इसलिए उन्होंने यह रोल चुना।
अरविंद एक ऐसे पिता हैं जो अल्जाइमर के शुरुआती चरण से गुजर रहे हैं। वह कभी-कभी नाम और चेहरों को भूल जाते हैं, पर उनका स्नेह और एहसास मिटता नहीं। इस वजह से संदीप को किरदार के लिए धीरे-धीरे और सावधानी से तैयारी करनी पड़ी—कभी वह बिलकुल खोया हुआ दिखता है, तो कभी बिलकुल स्पष्ट; यही बदलाव चरित्र की खास बात है।
निर्देशन टीम की साफ़-सी गाइड और ब्रीफ ने उन्हें भूमिका समझने में मदद की। संदीप बताते हैं कि अरविंद की पहचान उसके काम और हुनर में बसी है—वह साड़ी के काम से गहराई से जुड़ा है। उसकी यादें धुंधली पड़ती जा रही हैं, फिर भी जब वह साड़ियों को छूता है, तो किसी तरह उसका पुराना खुद जाग उठता है। पिछले रोलों के मुकाबले अरविंद की भावनाएँ टूट-फूट कर सामने आती हैं और रिश्तों से दूरी की अनुभूति मिलती है। साड़ियों का यह कनेक्शन इस किरदार को एक नर्म और असली एहसास देता है।
यह संदीप का प्रतीक और पार्थ के साथ तीसरा शो है और वे दोनों को अपना परिवार मानते हैं। संदीप ने कहा कि उन्हें यह मौका देने के लिए वे दिल से शुक्रगुजार हैं।